अंक: February 2012
 
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अनंत काल से, एक - दूसरे से दूर देशों और....
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  मुक्त व्यापार समझौते और भारत
विपुल चटर्जी
जोसेफ जार्ज
  अनेक देश मुक्त व्यापार समझौतों ...
  भारत का हस्तशिल्प निर्यात
विजय ठाकुर
  भारत का हस्तशिल्प क्षेत्र जो ग्रामीण ...
  भारत से निर्यात संभावनाएं
संजय तिवारी
  दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्था...
  कृषि निर्यात
संदीप दास
  साधारण शुरुआत के बाद भारत..
  भुगतान संतुलन की प्रवुत्तियां और चुनौतियां
जोमोन मैथ्यू
  भुगतान संतुलन (बीओपी)..
 
 
 
सपना समतामूलक समाज का
न्यायमूर्ति के.जी. बालाकृष्णन

महात्मा गांधी ने खादी की खोज की,लेकिन इससे पहले ही खादी भारतीय सभ्यता की जडों में समाहित थी |वैदिक काल में आर्य खुद अपने लिए कपडे बुनते थे |ये हाथ के बुने होते थे और शादि-विवाह के समय दुल्हन को यह ध्यान दिलाने के लिए खादी चरखा भेंट किया जाता था कि उन्हें कपडों के मामलों में स्वावलंबी बनना है |ऋग्वेद में खादी के बारे में कहा गया है-ऐसा कपडा बुनो और रंगा जो गांठरहित हो, जिसका रंग चटक होऔर जिसके जरिये सतत आनुवंशिक प्रकाशित करो |

कबिर ने अपने प्रसिद्ध दोहे के जरिये खादि को अमर कर दिया है | उन्होंने कहा :

अष्ट कमल का च रखा बनाया,
पांच तत्व की पूनी |
नौ-दस मास बनन को लागे,
मरख मैली कीनी|

 
 
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