महात्मा गांधी ने खादी की खोज की,लेकिन इससे पहले ही खादी भारतीय सभ्यता की जडों में समाहित थी |वैदिक काल में आर्य खुद अपने लिए कपडे बुनते थे |ये हाथ के बुने होते थे और शादि-विवाह के समय दुल्हन को यह ध्यान दिलाने के लिए खादी चरखा भेंट किया जाता था कि उन्हें कपडों के मामलों में स्वावलंबी बनना है |ऋग्वेद में खादी के बारे में कहा गया है-ऐसा कपडा बुनो और रंगा जो गांठरहित हो, जिसका रंग चटक होऔर जिसके जरिये सतत आनुवंशिक प्रकाशित करो |
कबिर ने अपने प्रसिद्ध दोहे के जरिये खादि को अमर कर दिया है | उन्होंने कहा :
अष्ट कमल का च रखा बनाया,
पांच तत्व की पूनी |
नौ-दस मास बनन को लागे,
मरख मैली कीनी|
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