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| पृष्ठ कथा |
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| पिछले कुछ दशकों में भारत एक के बाद एक आई आपदाओं से इस कदर आहत और क्षत-विक्षत हुआ है कि उसे संभलने का अवसर ही नहीं मिल सक |
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अग्र लेख
जीवन, संपति और संरचनाओं का सरंक्षण
राष्टिय आपदा प्रबंधन प्रधिकरण (एनङीएमए) के उपाध्यक्ष के साथ योजना की बातचीत के अंश
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| Articles |
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मुक्त व्यापार समझौते और भारत
विपुल चटर्जी
जोसेफ जार्ज
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अनेक देश मुक्त व्यापार समझौतों ...
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भारत का हस्तशिल्प निर्यात
विजय ठाकुर |
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भारत का हस्तशिल्प क्षेत्र जो ग्रामीण ...
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भारत से निर्यात संभावनाएं
संजय तिवारी |
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दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्था...
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कृषि निर्यात
संदीप दास
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साधारण शुरुआत के बाद भारत..
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भुगतान संतुलन की प्रवुत्तियां और चुनौतियां
जोमोन मैथ्यू |
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भुगतान संतुलन (बीओपी)..
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आपदा प्रबंधन: आवश्यकता एवं पुनर्मूल्यांकन |
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जल, सिंचाई और बाढ संबंधी मुदृदौं पर काम करने वाले अनेक विभागों ने हाल ही में अपने नाम बदल लिए हैं|
अब सिंचाई विभाग जल संसाधन विभाग बन गया है, बाढ नियंत्रण ने बाढ प्रबंधन नाम धारण कर लिया है और राहत एवं पुनर्वास विभाग ने आपदा प्रबंधन विभाग का चोला पहन लिया है| नाम परिवर्तित देखकर ऐसा जान पडता है मानो इन विभागों की कार्यशैली बहुत सुधर गई हो|
लेकिन अगर कोई पूछे कि उनकी कार्यशैली में क्या बदलाव आया है तो इसका शायद ही कोई समुचित उत्तर मिल पाए| ये अधिकांश विभाग अब भी वही काम कर रहे है|
बाढ नियंत्रण वाले अब भी तटबंध बनाते हैं और आपदा प्रबंधन विभाग उसी प्रकार राहत कार्य करता है| अगर नाम बदलने से कार्यशैली बदल जाती तो फिर और कुछ करने की क्या जरूरत पडती?
मानव जीवन को प्रभावित करने वाली सभी चीजों के बारे में यह बात सच है लेकिन जनजीवन को मुश्किलों से सराबोर करने वाली आपदा बाढ के बारे में ज्यादा सच है|
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