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मुद्दे, चुनौतियां और उपाए उमेश नारायण पंजियार |
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पानी हमारे जिंदा रहने के लिए एक महत्वपूर्ण आवश्यकता ही नहीं, बल्कि राष्ट्र के आर्थिक विकास का एक साधन भी है| जल एक नवीकरणीय संसाधन है| इसका प्रकृति में सुरक्षित भंडार सीमित है, अतः हमें इसके सतत विकास और कुशल प्रबंधन की योजना तैयार करनी है ताकि बढ़ती जनसंख्या, विस्तारित हो रहे उद्धोगों और तेज़ी से शहरीकरण के कारण बढ़ती ज़रुरतें पूरी की जा सकें और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौंतियों का सामना करने के लिए हम अपने आप को बेहतर ढंग से तैयार कर सकें|
उपलब्ध और उपयोग लायक जल
देश में हर साल लगभग 1,170 मिलीमीटर बर्षा होने का अनुमान लगाया गया है|इसे अगर देश में होने वाली कुल बर्फ़बारी और ग्लेशियरों से मिलने वाले जल की मात्रा के साथ मिला लें, तो यह लगभग 4,000 अरब घनमीटर बैठती है|लेकिन अगर वाष्पीकरण के ज़रिए नष्ट होने वाले पानी का भी हिसाब लगाएं,तो देश में कुल 1,869 अरब घनमीटर पानी होने का अनुमान है|
यह उपलब्ध सारा जल भौगोलिक और अन्य कारणों से काम में नहीं आ पाता और ऐसा अनुमान है कि इसमें से सिर्फ़ लगभग 1,123 अरब घनमीटर पानी ही काम लायक होता है|इस मात्रा का 690 अरब घनमीटर जल सतही और 433 अरब घनमीटर फिर से भरपाई किया हुआ पानी होता है|जल की इस उपलब्धता में भी देश और काल की विभिन्नता के कारण अंतर आता है|
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जम्मू-कश्मीर विविधताओं और बहुलताओं का घर है| फुर्सत के पल गुजारने के अनेक तरकीबें यहाँ हर आयु वर्ग के लोगों के लिए बेशुमार है| इसलिए अगर आप ऐडवेंचर टूरिस्म या स्पोर्ट अथवा रोमांचकारी पर्यटन में रूचि रखते हैं तो जम्मू-कश्मीर के हर इलाके में आपके लिए कुछ न कुछ है.
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