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| पृष्ठ कथा |
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| अनंत काल से, एक - दूसरे से दूर देशों और.... |
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अग्र लेख
मुक्त व्यापार समझौते और भारत
विपुल चटर्जी
जोसेफ जार्ज
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| Articles |
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मुक्त व्यापार समझौते और भारत
विपुल चटर्जी
जोसेफ जार्ज
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अनेक देश मुक्त व्यापार समझौतों ...
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भारत का हस्तशिल्प निर्यात
विजय ठाकुर |
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भारत का हस्तशिल्प क्षेत्र जो ग्रामीण ...
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भारत से निर्यात संभावनाएं
संजय तिवारी |
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दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्था...
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कृषि निर्यात
संदीप दास
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साधारण शुरुआत के बाद भारत..
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भुगतान संतुलन की प्रवुत्तियां और चुनौतियां
जोमोन मैथ्यू |
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भुगतान संतुलन (बीओपी)..
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असंगठित क्षेत्र की छतरी |
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यह कितनी बड़ी बिडंबना है कि देश के सकल घरेलु उत्पाद में 63 प्रतिशत का योगदान करने वाले मजदूर मौजूदा दौर में जिंदगी की आम ज़रूरतों और सहूलियतों से महरूम हैं| राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षंण चार साल पहले यानी सन् 2004-2005 में हुआ था| इस सर्वेक्षंण के मुताबिक उस वक्त कुल 45.9 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ था,जिसमें संगठित क्षेत्र में महज 2.6 करोड़ लोग ही नौकरियां कर रहे थे,जबकि उम्मीद से भी कहीं ज्यादा यानि करीब 43.3 करोड़ लोग असंगठित क्षेत्र की नौकरियों के ज़रिये अपनी ज़िदगी की गाड़ी खींच रहे थे| चार साल बीतने के बावजूद संगठित क्षेत्र और असंगठित क्षेत्र के इस विरोधाभासी संतुलन में कोई अंतर नहीं आया है| बल्कि आज आर्थि मंदी के दौर में जिस तरह नौकरियों पर संक बन आया है, उससे साफ है कि असंतुलन और बड़ा ही होगा| देश के सकल घरेलु उत्पाद में असंगठित क्षेत्र के इस योगदान को खुद राज्यसभा में श्रम मंत्री आँस्कर फर्नांडिस भी स्वीकार कर चुके हैं|
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