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| पृष्ठ कथा |
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| अनंत काल से, एक - दूसरे से दूर देशों और.... |
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अग्र लेख
मुक्त व्यापार समझौते और भारत
विपुल चटर्जी
जोसेफ जार्ज
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| Articles |
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मुक्त व्यापार समझौते और भारत
विपुल चटर्जी
जोसेफ जार्ज
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अनेक देश मुक्त व्यापार समझौतों ...
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भारत का हस्तशिल्प निर्यात
विजय ठाकुर |
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भारत का हस्तशिल्प क्षेत्र जो ग्रामीण ...
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भारत से निर्यात संभावनाएं
संजय तिवारी |
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दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्था...
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कृषि निर्यात
संदीप दास
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साधारण शुरुआत के बाद भारत..
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भुगतान संतुलन की प्रवुत्तियां और चुनौतियां
जोमोन मैथ्यू |
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भुगतान संतुलन (बीओपी)..
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ज्ञानवान समाज के निर्माण की जरूरत |
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भारत जैसे-जैसे विकास और प्रगति के रोमांचकारी नये भविष्य की ओर बढ रहा है, सतत विकास का एजंङा गढने में ज्ञान की भूमिका महत्वपूर्ण होती जाएगी | ज्ञानवान समाज के निमार्ण की धारणा अब कोई विमर्शनीय विलासिता नहीं रह गई है, इसके महत्व को विश्वभर के नीति-नियामक अब भलीभांति स्वीकार कर चुके हैं | भारत में यह विचार, देश के समक्ष चुनौतियों के कारण और भी महत्वपूर्ण बन गया है | हमारी जनसंख्या के 55 करोङ लोगों का 25 वर्ष से कम आयु का होना एक बहुत बडा जनसंख्यात्मक लाभांश है, क्योंकि यह एक विशाल मानव संसाधन है | मानव संसाधन की इस अतुलनीय निधि की शिक्षा और कौशल विकास एजेंडा पर जोर देते हुए उसे सलीके से साधने की जरूरत है ताकि वह 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना कर सके | देश में आज जो विशाल असमानता दिखाई दे रही है वह ज्ञान प्राप्ति के पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण है | उसके निराकरण के लिये हमें शिक्षा के अवसरों में पर्याप्त वृध्दि करनी होगी, एक ऐसी समावेशी शिक्षा प्रणाली लानी होगी कि कोई भी इसकी परिधि से बाहर नहीं रह सके | अंतत: देश के विकास को गति देने के लिए एक ऐसी शिक्षा प्रणाली के गठन की आवश्यकता है जो नवाचार एवं उधमिता को बढावा दे सके और बढती अर्थव्यवस्था की कौशल आवश्यकताओं को पूरा सके |
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