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छियासिवें संविधान अधिनियम, 2002 ने संविधान के भाग-3 में एक नया अनुच्छेद 21-क समाविष्ट किया जिसमें 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना बुनियादी अधिकार बना दिया गया है | तथापि, 86वें संविधान संशोधन को प्रभावी बनाने हेतु एक उपयुक्त अनुवर्ती विधान की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही थी | संसद दवारा बीते महीने पारित बच्चों का नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिकार कानून, 2009 इसी जरूरत के मद्देनजर लाई गई थी |
अनिवार्य और नि:शुल्क शिक्षा कानून, 2009
शिक्षा के मौलिक अधिकार को व्यावहारिक शक्ल देने के लिए छह से चौदह साल तक के बच्चों को अनिवार्य एवं नि:शुल्क शिक्षा अधिनियम को संसद ने पारित कर दिया है | राष्ट्रपति का अनुमोदन भी इसे प्राप्त हो चुका है |
इस कानून में कई क्रांतिकारी उपाय किए गए हैं जिनमें निजी स्कूलों में गरीबों और वंचितों के बच्चों के लिए 25 फीसदी सीटों का आरक्षण और बच्चों को हर साल की परिक्षाओं से मुक्ति शामिल है | मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने स्वीकार किया कि यह लक्ष्य पाना आसान नहीं है और कानून बनते ही सब कुछ ठीक नहीं हो जाएगा, लेकिन उन्होंने भरोसा दिलाया कि इसे अंजाम तक ले जाने के लिए केंद्र अपनी पूरी जिम्मेदारी निभाएगा जिसमें धन की कमी नहीं होगी | उन्होनें कहा कि जो राज्य इस मालले में अपने हिस्से का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं होंगे उनका मामला वित्त आयोग के सामने रखा जाएगा और उन्हें अतिरिक्त धन मुहैया कराया जाएगा |
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