|
संसद में 4 अगस्त, 2009 को बच्चों का नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम पारित हो गया है | इसके साथ ही देश के प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का मौलिक अधिकार प्राप्त हो गया है | यह ऐतिहासिक विधान 6 से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के केंद्र और राज्य सरकारों के दायित्व को रेकांखित करता है | आइए इस अधिनियम के बुनियादी प्रावधानों पर नजर डालें:
इस अधिनियम में क्या है?
अधिनियम में इस बात का प्रावधान किया गया है कि 6 से 4 वर्ष तक के बच्चे को अपने पडोस के विधालय में आठवीं कक्षा तक बुनियादी शिक्षा नि:शुल्क और अनिवार्य रूप से पाने का अधिकार है | यदि कोई बच्चा 6 वर्ष की आयु पर किसी विधालय में प्रवेश नहीं ले पाता है तो वह बाद में अपनी उम्र के अनुरूप कक्षा में प्रवेश ले सकता है | उसे अपनी कक्षा के स्तर पर आने के लिए नि:शुल्क प्रशिक्षण पाने का भी अधिकार होगा | किसी भी बच्चे को प्रवेश से इंकार नहीं किया जाएगा और जब तक उसकी बुनियादी शिक्षा पूरी नहीं हो जाती, उसे न तो विधालय से निकाला जाएगा और न ही उसे रोका जाएगा | यदि वह निर्धारित 14 वर्ष की आयु तक बुनियादी शिक्षा पूरी नहीं कर पाता, तो उसके बाद भी पढाई पूरी होने तक, उसे नि:शुल्क शिक्षा दी जाती रहेगी | |