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भारत का हस्तशिल्प निर्यात
विजय ठाकुर
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भारत का हस्तशिल्प क्षेत्र जो ग्रामीण और
अर्दशहरी क्षेत्रों में रोजगार देने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है, पिछले चार वर्षो में संकट के दौर से गुज़र रहा है किसी उल्लेखनीय प्रगति के बजाय देश का निर्यात जो 2006-07 में 17,288 करोड़ का था,2010-11 में गिरकर 10,533 करोड़ पर आ गया |
दिलचस्पी की बात यह है की वर्ष 2006-07 में यह अनुमान लगाया था की 2010 तक यह क्षेत्र 30,000 करोड़ से ऊपर निकल जाएगा, परंतु अनुमानित लक्ष्य से यह ६६ प्रतिशत पीछे रह गया| इस गिरावट का मुख्य कारण यों तो 2008 में छाई बैसिवक मंदी को बताया जाता ह ै|
हस्तशिल्प क्षेत्र के विशेषज्ञों को यह कल्पना नहीं थी की स्थिति इतनी बिगड़ सकती है और उसे पटरी पर वापस आने में इतना लंबा समय लग सकता है| यह क्षेत्र जो ग्रामीण क्षेत्र के ७० लाख गरीब शिल्पियों को रोजगार प्रदान करता है, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अपनी चमक खोता जा रहा है |
यह अभी भी 2008 की बैसिवक मंदी के प्रभाव से निकलने के लिए संघर्ष कर रहा है और अपना निर्यात राजस्व घटाकर आधा कर चुका है|
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