अंक: April 2012
 
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16 मार्च, 2012 को वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी द्वार....
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अग्र लेख

सीमित संसाधन और दीर्धकालिक विकास का खाका
कमल नयन काबरा
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  सीमित संसाधन और दीर्धकालिक विकास का खाका
कमल नयन काबरा
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भुगतान संतुलन की प्रवुत्तियां और चुनौतियां
जोमोन मैथ्यू

भुगतान संतुलन (बीओपी) खाते किसी देश और शेष विशव के बीच सभी मौद्रिक कारोबार का लेखा -जोखा होता है| दूसरे शब्दों में, यह एक निर्द्रिष्ट अवधि में एक देश और अन्य सभी देशों के बीच समस्त लेन - देन का अभिलेख है| यदि किसी देश को धन मिला है, तो वह ऋण कहलाता है |

इसी प्रकार जब कोई देश धन देता है अथवा भुगतान करता है, इसे डेबिट अर्थात नामे डालना कहते है | सैद्धांतिक तौर पर यह कहा जाता है की भुगतान संतुलन (बीओपी) सदैव शून्य होना चाहिए | इसका अर्थ होता है कि परिसंपत्ति अथवा ऋण और देनदारियां अथवा नागे राशि, एक - दूसरे के बराबर होनी चाहिए |

परंतु हकीकत में ऐसा विरले ही होता है और इसलिए किसी देश का भुगतान संतुलन आमतौर पर घाटे अथवा अतिशेष में होता है| ऋणात्मक भुगतान संतुलन का अर्थ होता है कि देश से बाहर जाने वाला धन आने वाली राशि से कम है| इसकी विपरीत स्थिति भी इसी श्रेणी में आती है |

 
 
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