अंक : February 2015
  कठिन हालात में बेहतर बजट
अश्विनी महाजन
  बजट 2015-16, फरवरी माह के अंतिम दिन संसद में पेश किया गया, जो वास्तव में केंद्र में नई सरकार का पहला ही बजट है। हालांकि पिछले..
  सहयोगी और प्रतिस्पर्धी संघवाद को मिली राह
रहीस सिंह
  सत्ता के ऊपरी स्तर से नहीं बल्कि बुनियादी स्तर से काम करना चाहिए......सत्ता के बहुत..
  राष्ट्रीय कौशल विकास कार्यक्रम: भावी रूपरेखा
स्वदेश सिंह
  यांत्रिक युग में जब आज अधिकांश दैनिक कार्यकलाप यंत्राधारित हो चले हैं तो इन यंत्राधारित कार्यों और
  दूरदर्शी और विकासोन्मुखी रेल बजट
अरविंद कुमार सिंह
  इस बार रेल बजट पेश हुआ तो नयी घोषणाओं की कई वर्षों की रस्म मानो टूट गई। इसकी कुछ आलोचना भी हुई लेकिन अर्से बाद
  जन धन, आधार, मोबाइल और डिजिटल सशक्तीकरण
उमाशंकर मिश्र, सुबोध कुमार
  पारदर्शिता, प्रभावोत्पादकता और पारस्परिकता (संवाद की दृष्टि से) इन तीन अभिनव गुणों की वजह सूचना प्रौद्योगिकी...
संपादकीय
 
 

निवेश और विकास पर ध्यान

बहुत सारी उम्मीदों के बीच वर्तमान सरकार का पूर्ण बजट आ चुका है। हालांकि लोकप्रिय घोषणाओं के उलट इस बजट में कई छोटे लेकिन प्रभावी कदमों की घोषणा की गई है जो निवेश और विकास को बढावा देंगे। वित्तमंत्री ने अर्थव्यवस्था से संबंधित कुछ मौलिक मुद्दों के समाधान का प्रयास किया है जिसमें लंबे समय के लिए टिकाऊ विकास और 8 फीसदी से ऊपर सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर का लक्ष्य रखा गया है ताकि भारत दुनिया की सबसे तेज रफ्तार विकास दर वाली अर्थव्यवस्था बन सके। सरकार के समावेशी विकास को केंद्र में रखते हुए इस बजट में देश के विकास में आम-लोगों की भागीदारी को स्वीकार किया गया है और उनको सशक्त करने की कोशिश की गई है ताकि वे अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकें। इस बजट में जीविका और निवेश के मौकों को विस्तृत करने की नींव रखी गई, दूसरी तरफ सामाजिक सुरक्षा तंत्र के निर्माण करने की भी कोशिश है। नई पेंशन योजना में टैक्स कटौती सीमा को 1.5 लाख तक बढ़ाना, स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर 25 हजार रुपये तक कर छूट, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन-ज्योति बीमा योजना की घोषणा-जिसमें नाममात्र प्रीमियम पर किसी की आकस्मिक मृत्यु होने पर दो लाख रुपये के बीमा का प्रावधान है-इस दिशा में उठाए गए कुछ महत्वपूर्ण कदम हैं। महिला सुरक्षा, जागरूकता व प्रचार अभियान के लिए साल 2015-16 के बजट में निर्भया फंड में 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

 

Yojana Archives   Recent Archives  

 
वैश्विक विनिर्माण हब के रूप में भारत
अमिताभ कांत

आज भारत की साख पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है। हर तरपफ दृश्यमान गति, ऊर्जा और आशावाद है। ‘मेक इन इंडिया’ भारत में निवेश के दरवाजे खोल रहा है। एकाधिक उद्यम अपने इस मंत्र को अपना रहे हैं। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र दुनिया की सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। ‘मेक इन इंडिया’ संकट की इसी पृष्ठभूमि में शुरू किया गया था, मगर देखते देखते भारत के असंख्य हितधारकों तथा भागीदारों के लिए यह एक नारा बन गया। यह भारतीय नागरिकों और कारोबारी प्रतिनिधियों, तथा दुनियाभर के निवेशकों के लिए एक शक्तिशाली तथा प्रेरक आह्वान था ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम की शुरुआत सितंबर 2014 में राष्ट्र निर्माण की पहल के एक भाग के रूप में की गई थी। भारत को एक वैश्विक विनिर्माण हब में बदलने के लिए इसकी रूप रेखा बनाई गई, ‘मेक इन इंडिया’ एक संकटपूर्ण स्थिति से बाहर निकालने की समयबद्ध कार्यक्रम था, 2013 तक छलांग लगाते बाजार का बुलबुला एकाएकट फूट चुका था और भारत की विकास दर एक दशक के सबसे निचले स्तर तक पहुंच चुकी थी। ब्रिक्स राष्ट्रों के वादे फीके पड़ चुके थे और भारत को विश्व के सबसे नाजुक पांच देशों के रूप में चिह्नित किया जा चुका था और बहस तेज हो गई थी कि दुनिया के सबसे बड़ा लोकतंत्र निवेशकों के लिहाज से एक अवसर देने वाली जगह है या जोखि़म भरी जगह बन कर रह गया है। भारत के 120 करोड़ की आबादी वाले नागरिक सवालों के घेरे में थे कि वो बड़ा इसलिए हैं कि उन्हें सफल होना है या बड़ा इसलिए हैं कि उन्हें असफल होना है।


 

Regional Languages
Regional Languages
Hindi
English
Assamese
Bengali
Gujarati
Kannada
Malayalam
Marathi
Oriya
Punjabi
Tamil
Telugu
Urdu

झरोखा जम्मू कश्मीर का : कश्मीर में रोमांचकारी पर्यटन
जम्मू-कश्मीर विविधताओं और बहुलताओं का  घर है| फुर्सत के पल गुजारने के अनेक तरकीबें यहाँ हर आयु वर्ग के लोगों के लिए बेशुमार है| इसलिए अगर आप ऐडवेंचर टूरिस्म या स्पोर्ट अथवा रोमांचकारी पर्यटन में रूचि रखते हैं तो जम्मू-कश्मीर के हर इलाके में आपके लिए कुछ न कुछ है.
Ministry of I&B
Publications Division
Employment News
 
Copyright © 2008 All rights reserved with Yojana Home  |  Disclaimer  |  Contact 

This site is best viewed using a screen resolution of 1024 x768

Last updated: Wednesday, July 01, 2009