अंक : July 2015
  विकास के संवाहक हैं शहर
ईशर अहलूवालिया
  हम स्मार्ट सिटीज को परिभाषित करें तो एक ऐसा शहर जहां के बाशिंदों को बेहतर शासन प्रणाली...
  स्मार्ट शहरः भारतीय संदर्भ
उषा पी रघुपति
  भारत अन्य देशों की तरफ प्रेरणाके लिए देख सकता है लेकिन इसे अपने शहरों को तकनीकी रूप से उच्चतर और....
  स्मार्ट शहरों में डिजिटल गवर्नेंस
आर चंद्रशेखर
  स्मार्ट शहरों के परिदृश्य के अंतर्गत आने वाले कुछ कदमों का प्राथमिकीकरण स्मार्ट शहरों संभावित की आवश्यकताओं ....
  राष्ट्रपति भवनः एक स्मार्ट धरोहर टाउनशिप
सुरेश यादव.
  स्मार्ट सिटी की अवधारणा मुख्यतः किसी ऐसे शहरी प्रतिष्ठान का उल्लेख करती है, जो ..
  पर्यावरण भी रहे स्मार्ट
प्रभांसु ओझा
 
संपादकीय
 
 

स्मार्ट भारत की ओर...

पिछले कुछ वर्षों में यह प्रश्न हर किसी की कल्पना का केंद्र बन गया है कि हम स्मार्ट जीवन कैसे जी सकते हैं। बढ़ती जनसंख्या और तेजी से होते शहरीकरण ने लोगों को बड़े पैमाने पर गांवों से शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन के लिए विवश कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप ऊर्जा, परिवहन, जल, आवास एवं सार्वजनिक स्थानों पर बड़ा दबाव पड़ा है। नीति निर्माता इन समस्याओं को हल करने के लिए रास्ते तथा साधन तलाशने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। स्मार्ट शहरों जैसे उपायों की अधिक से अधिक आवश्यकता अनुभव की जा रही है, जो एक ओर तो सक्षम एवं संवहनीय होंगे और दूसरी ओर आर्थिक समृद्धि तथा सामाजिक कल्याण के कारण भी बनेंगे।

पिछले कुछ वर्षों में यह प्रश्न हर किसी की कल्पना का केंद्र बन गया है कि हम स्मार्ट जीवन कैसे जी सकते हैं। बढ़ती जनसंख्या और तेजी से होते शहरीकरण ने लोगों को बड़े पैमाने पर गांवों से शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन के लिए विवश कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप ऊर्जा, परिवहन, जल, आवास एवं सार्वजनिक स्थानों पर बड़ा दबाव पड़ा है। नीति निर्माता इन समस्याओं को हल करने के लिए रास्ते तथा साधन तलाशने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। स्मार्ट शहरों जैसे उपायों की अधिक से अधिक आवश्यकता अनुभव की जा रही है, जो एक ओर तो सक्षम एवं संवहनीय होंगे और दूसरी ओर आर्थिक समृद्धि तथा सामाजिक कल्याण के कारण भी बनेंगे।

यह सच है कि कृषि क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। किंतु फिलहाल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का दो तिहाई हिस्सा शहरी क्षेत्र से आता है। यह तथ्य कि शहर भारत के आर्थिक विकास के संचालक हैं, हमारे शहरों में अत्याधुनिक ढांचागत सुविधाओं तथा सेवा आपूर्ति प्रणालियों की आवश्यकता को रेखांकित करता है। स्मार्ट सिटी मिशन स्वच्छ जल की पर्याप्त आपूर्ति, सफाई, ठोस कचरा प्रबंधन, प्रभावी शहरी परिवहन एवं सार्वजनिक परिवहन, मजबूत आईटी संपर्क, गरीबों के लिए किफायती आवास जैसी प्रमुख ढांचागत सेवाओं के इंतजाम पर जोर देता है। देश भर में 100 स्मार्ट शहर बनाने का सरकार का यह महत्वाकांक्षी कार्यक्रम समावेशी वृद्धि पर आधारित चतुर एवं सतत विकास को सुनिश्चित करने के लक्ष्य पर केंद्रित है। यह मिशन 2015-16 से 2019-2020 के बीच पांच वर्ष में 100 शहरों को दायरे में लेगा। समावेशी प्रकृति के ऐसे स्मार्ट शहर सर्वांगीण विकास के लिए अत्याधुनिक आईटी उपकरणों का प्रयोग करते हुए शहरी गरीबों तथा वंचित वर्गों के लिए रोजगार के और अवसर सृजित करेंगे। अटल मिशन फाॅर रिजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफाॅर्मेशन (अमृत) स्मार्ट सिटीज मिशन के लिए पूरक का कार्य करेगा। स्मार्ट सिटी मिशन एवं अमृत पर क्रमशः 48,000 करोड़ रुपये और 50,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं।

एक अन्य कार्यक्रम प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत सरकार झुग्गीवासियों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों एवं कम आय वाले वर्गों से आने वाले लोगों के लिए शहरी क्षेत्रों में 2 करोड़ किफायती मकानों के निर्माण पर अगले सात वर्ष में लगभग 3 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी। आजीविका की कठोर वास्तविकता से जूझ रहे लाखों झुग्गीवासियों एवं शहरी गरीबों के लिए यह वरदान सरीखा होगा। सूचना एवं डिजिटल प्रौद्योगिकियों का प्रयोग करते हुए अत्याधुनिक ढांचागत सुविधाएं एवं प्रभावी सेवा प्रणाली उपलब्ध कराने के लक्ष्य के साथ स्मार्ट सिटीज मिशन सामाजिक एवं आर्थिक विभाजन पाटने में योगदान करेगा। साथ ही अन्य देशों के स्मार्ट शहरों की नकल करने के बजाय भारत को अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी रणनीतियां तैयार करनी होंगी। प्रौद्योगिकी विशेषकर आईटी क्षेत्र में महारत तथा दक्ष कर्मचारियों की पर्याप्त उपलब्धता स्मार्ट सिटीज परियोजना के क्रियान्वयन में भारत के लिए लाभप्रद हैं। जनता के सही रवैये, प्रभावी प्रशासन एवं भ्रष्टाचार उन्मूलन से ही भारत स्मार्ट जीवन के युग में प्रवेश करने तथा अपने नागरिकों के लिए अधिक स्मार्ट दुनिया बनाने की आशा कर सकता है। ।

 

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आर. बी. भगत
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स्मार्ट शहर डिजिटल विभाजन को बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि शहर के भीतर एवं शहर तथा गांवों के बीच विभाजन समाप्त करने के लिए हैं। स्मार्ट शहर के विचार को सूचना एवं डिजिटल प्रौद्योगिकियों के प्रयोग से शहरी क्षेत्रों में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने एवं पर्याप्त तथा प्रभावी सेवा आपूर्ति सुनिश्चित करने की दृष्टि से देखा जाना चाहिए। इन कार्यक्रमों की सफलता का निर्णय भविष्य में यह देखकर होगा कि इन्होंने लोगों के जीवन को कितना बदला और हमारे समाज में बढ़ रही असमानता को कितना कम किया. मानव सभ्यता को शहरों ने आगे बढ़ाया है, जो सत्ता, संस्कृति, व्यापार के ठिकाने तथा उत्पादन के केंद्र रहे हैं। इतिहासकार सिंधु घाटी की सभ्यता को शहरी सभ्यता मानते हैं। बाद के काल में भारत में कई बड़े शहरी केंद्र हुए, जिनमें प्राचीन काल में पाटलिफत्र (पटना), वैशाली, कौशांबी तथा उज्जैन एवं मध्यकाल में आगरा तथा शाहजहांनाबाद (दिल्ली) प्रमुख हैं। भारत की शहरी सभ्यता की बात करें तो सूची बहुत लंबी है। (रामचंद्रन 1995, शर्मा 2005, चंपकालक्ष्मी 2006) स्मार्ट सिटी के विचार को समझने के लिए यह समझना आवश्यक है कि शहर केसे होते हैं। शहर घनी आबादी वाले क्षेत्र होते हैं, जिनमें अलग-अलग व्यवसाय तथा कौशल एवं जातीय तथा सामाजिक संरचना वाले लोग एक साथ रहते हैं। वास्तव में विविधता और भिन्नता हमेशा से ही शहरों की पहचान रही हैं, जिनसे नए विचारों को बढ़ावा मिला है किंतु समावेश, निष्पक्षता तथा न्याय संबंधी चुनौतियां भी खड़ी हुई हैं। शहर अलग-थलग भी नहीं होते हैं बल्कि शहरी क्रम में एक दूसरे से जुड़े रहते हैं, जिनसे शहरी प्रणाली का विकास होता है। शहरी क्रम के निचले स्तर (छोटे शहर एवं नगर) ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक करीब से जुड़े होते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन बड़े शहरों से छोटे शहरों तक प्रत्येक स्तर पर होता है। इस दृष्टिकोण से शहर आर्थिक वृद्धि के केंद्र ही नहीं होते हैं बल्कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों समेत सभी प्रकार की आबादी को विकास के फल भी देते हैं। इसके अलावा शहर अपनी सीमाओं के भीतर ही नहीं बल्कि सभी शहरों और कस्बों में आवागमन एवं आदान-प्रदान का कारण भी बनते हैं। वे सूचना, पूंजी, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही तथा मजदूरों के आवागमन के माध्यम से भी एक दूसरे से जुड़े रहते हैं। चूंकि अतीत में विभिन्न शहर आर्थिक प्रगति एवं सामाजिक परिवर्तन के अग्रदूत रहे हैं, इसलिए मानव इतिहास के अपने-अपने युग में वे स्मार्ट रहे हैं। किंतु स्मार्ट सिटी की वर्तमान बारीकियों को वैश्वीकरण की शक्तियों और सूचना प्रौद्योगिकी के विराट विस्तार के वर्तमान संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जिनसे हमारे शहरों की सूरत तय हो रही है और जिनका हमारे जीवन पर प्रभाव रहा है।


 

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Last updated: Wednesday, July 01, 2009