अंक : April 2015
  विनिर्माण आधारित आर्थिक वृद्धिः प्रतिस्पर्धा और चुनौतियां
- अरूप मित्रा
  सकल कारक उत्पादकता वृद्धि यानी टीएफपीजी को महत्वपूर्ण ढंग से बढ़ाने की जरूरत है। खासकर उन उद्योगों में जिनमें निर्यात की संभावना है और ..
  भारतीय विनिर्माण में संपोषणीयता व नवाचार की आवश्यकता
- बालकृष्ण सी राव
  विनिर्माण के पारंपरिक क्षेत्रों में शोध के अलावा संपोषणीयता के हिसाब से देखें तो भारतीय अकादमिक जगत और उद्योग कुछ नवीन परिवर्तनशील तकनीक पर भी....
  मेक इन इंडिया के लिए स्किल इंडिया
- उत्सव कुमार सिंह
  विनिर्माण उद्योग के विकास को समर्पित ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम की सफलता ‘स्किल इंडिया’ की सफलता पर निर्भर है। अगर हम युवा....
  भारत में विधिक सहायता तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका
- मनोज कुमार सिन्हा
  कानूनी सहायता कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय प्राधिकरण, राज्य प्राधिकरण और जिला प्राधिकरण अन्य सरकारी तथा गैर-सरकारी एजेंसियों ...
  ई-काॅमर्सः छोटे उद्यमी के लिए बड़ा बाजार
- शिशिर सिन्हा
  इलेक्ट्राॅनिक काॅमर्स ने कारोबार को भौगोलिक सीमा से बाहर निकाल दिया है। सच पूछिए तो ये एक वैश्विक बाजार है जिसमें...
संपादकीय
 
 

विकास की आस

किसी भी अर्थव्यवस्था के विकास के लिए विनिर्माण क्षेत्र महत्वपूर्ण होता है। भारत जैसे विकासशील देश अपने विकास और रोजगार के लिए अधिकांशतः विनिर्माण पर ही आश्रित हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था जो पारंपरिक रूप से कृषि आधारित रही है, अब विनिर्माण की तरफ लंबी छलांग लगा रही है जो अर्थव्यवस्था में 16 फीसदी का योगदान करता है लेकिन रोजगार और विकास में इसका योगदान इसकी वास्तविक क्षमता से कहीं कम है। कठोर और निषेधात्मक श्रम-कानून, कुशल श्रम-बल की तुलना में अकुशल श्रम-बल की विशालता और तकनीक प्रयोगधर्मिता की कमी कुछ ऐसे मुद्दे हैं जो इसकी मुख्य वजह हैं।

 

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भारतीय विनिर्माण में संपोषणीयता व नवाचार की आवश्यकता
- बालकृष्ण सी राव

विनिर्माण के पारंपरिक क्षेत्रों में शोध के अलावा संपोषणीयता के हिसाब से देखें तो भारतीय अकादमिक जगत और उद्योग कुछ नवीन परिवर्तनशील तकनीक पर भी ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। 3-डी प्रिंटिग या योगज विनिर्माण तकनीक का आगमन एक ऐसी तकनीक है कि इसने हाल के दशक में कल-पुर्जों के विनिर्माण के कुछ ऐसे क्षेत्रों में आमूलचूल परिवर्तन ला दिया है जो मुख्यतः अधातु पदार्थों से बने हैं।
दुनिया की कई स्वतंत्र संस्थाओं जैसे इंटरनेशनल इनर्जी एजेंसी (आईएईए), मिलेनियम इकोसिस्टम मैंनेजमेंट और जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी समिति द्वारा जलवायु परिवर्तन को वैज्ञानिक रूप से मानवता के लिए गंभीर खतरा माना गया है। ऐसा विभिन्न मानवीय गतिविधियों द्वारा दुनिया भर में कई वर्षों से ग्रीन हाउस गैस के सतत उत्सर्जन की वजह से हुआ है। वास्तव में देखा जाए तो संसाधनों की कमी और अन्य संबंधित नकारात्मक प्रभाव, यहां का जनसंख्या घनत्व, विशाल समुद्री तट और आम जनता की भलाई के लिए प्रसांगिक अन्य कारकों की वजह से भारत के लिए यह जलवायु परिवर्तन बहुत ही ज्यादा होगा।


 

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झरोखा जम्मू कश्मीर का : कश्मीर में रोमांचकारी पर्यटन
जम्मू-कश्मीर विविधताओं और बहुलताओं का  घर है| फुर्सत के पल गुजारने के अनेक तरकीबें यहाँ हर आयु वर्ग के लोगों के लिए बेशुमार है| इसलिए अगर आप ऐडवेंचर टूरिस्म या स्पोर्ट अथवा रोमांचकारी पर्यटन में रूचि रखते हैं तो जम्मू-कश्मीर के हर इलाके में आपके लिए कुछ न कुछ है.
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Last updated: Wednesday, July 01, 2009