अंक : May 2015
  आयुर्वेद का उद्भव और विकास
- डी.सी. कटोच
  आयुर्वेद की लोकप्रियता उस स्तर तक पहुंच गई है जहां से हम लोगों की स्वास्थ्य सेवा के लिए इसे प्रस्तुत कर सकते हैं किंतु इसमें सुरक्षा ..
  होम्योपैथी: एक सम्यक चिकित्सा
- राज के मनचंदा ,हरलीन कौर
  होम्योपैथी पूरे विश्व में लोकप्रिय हो रहा है और विश्व के विभिन्न हिस्सों में इसकी स्थिति में बदलाव आ रहा है ....
  सरल, सस्ती और सहज हैं वैकल्पिक प्रणालियां
रवि शंकर
  वैकल्पिक चिकित्सा प्रणालियों का अपना विज्ञान है और इनकी अपनी जांच पद्धति है। इनकी जांच पद्धति लक्षण आधारित है ....
  निवेश, वृद्धि और विकास के लिए सुधार
प्रभाकर साहू ,अभिरूप भूनिया
  संपूर्णता में देखें तो] सरकार के पहले साल के कार्यकाल में आर्थिक नीतियां सुधार, आधारभूत ढांचा, कारोबार को आसान बनाने पर केंद्रित है ताकि विनिर्माण के ...
  ऊर्जा क्षेत्रकः नई ऊंचाइयों का आसमां
के आर सुदामन
  अक्षय ऊर्जा बढ़ाने की सरकार की योजना से देश की जनता को अति आवश्यक ऊर्जा सुरक्षा मिलेगी। आगामी एक-दो दशक में भारत में 8.9 प्रतिशत वृद्धि होने की संभावना है ..
संपादकीय
 
 

संपूर्ण स्वास्थ्य की ओर...

काफी पहले चाल्र्स डार्विन ने विकासवाद का सिद्धांत दिया था जिसमें कहा गया था कि वातावरण के अनुरूप ढल जाने वाली प्रजातियों के जीवित रहने की संभावना उन प्रजातियों से अधिक होती है जो वातावरण के अनुरूप ढल नहीं पातीं। अस्तित्व की इस प्रतिस्पर्धा एवं आकांक्षा के कारण ही मनुष्य ने सदैव नए आविष्कार किए हैं और जीवन को चिरंतन बनाए रखने के तरीके तलाशे हैं। आज कोई भी हमारे दैनिक जीवन में आधुनिकीकरण के प्रभाव और उपयोगिता को नजरअंदाज नहीं कर सकता और इस बात से आंखें नहीं मूंद सकता कि इन आविष्कारों ने हमारे जीवन से कितनी कठिनाइयां दूर कर दी हैं। संचार और यात्रा के नए साधनों तथा चिकित्सा के क्षेत्र के बारे में यह बात विशेष रूप से सही है जहां नए मोर्चे जीते जा रहे हैं। रोग निदान की अत्याधुनिक तकनीकों तथा आधुनिक उपचार सुविधाओं ने जीवन रक्षा के व्यवसाय को बिल्कुल अलग आयाम दिया है। सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि प्रकृति में मानव के अत्यधिक हस्तक्षेप और अस्वास्थ्यकर जीवनशैली के कारण अधिक गंभीर एवं लाइलाज रोगों के रूप में कष्ट बढ़े हैं। हालांकि आधुनिक तकनीक ने रोगों के उपचार के नए तरीके तलाशने का प्रयास किया है, लेकिन रोग को रोकने अथवा पलटने में वह सक्षम नहीं है। ऐसे में मानव ने एक बार फिर प्रकृति की ओर देखना आरंभ कर दिया है और यहीं पर वैकल्पिक चिकित्सा तथा पद्धतियों की भूमिका आरंभ होती है। वे प्राकृतिक संतुलन बहाल करने तथा प्रकृति के साथ मानव जीवन का सामंजस्य बिठाने के सि़द्धांत पर कार्य करती हैं। भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली रोग का उपचार करने के बजाए सर्वांगीण स्वास्थ्य पर ध्यान देने वाले इसी सिद्धांत पर आधारित है। आयुर्वेद, होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा, योग, यूनानी, सिद्ध, ये सभी वैकल्पिक पद्धतियां ऐसी जीवन शैली का समर्थन करती हैं, जिससे शरीर और मस्तिष्क स्वस्थ रहता है तथा मनुष्य का पूर्ण रूप से कल्याण होता है। आयुर्वेद तथा योग की यात्रा प्राचीन भारतीय विज्ञान के रूप में 5000 वर्ष से भी पहले आरंभ हुई। सिद्ध दक्षिण भारत में लोकप्रिय प्राचीन चिकित्सा प्रणाली है और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति यूनानी का जन्म प्राचीन यूनान में हुआ। होम्योपैथी का विकास 19वीं शताब्दी के आरंभ में जर्मन चिकित्सक सैम्युअल हैनीमैन ने किया था। इन पद्धतियों पर कई वर्षों से जनता का विश्वास बना रहा है। किंतु पिछले कुछ समय में वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों को विश्व स्तर पर स्वीकार्यता एवं लोकप्रियता हासिल हुई है। इसका कारण इनके प्रभावी, सस्ती, दुष्प्रभाव रहित होने के अलावा यह भी रहा होगा कि इन्होंने कुछ गंभीर रोगों में तथा रोग की अंतिम अवस्था में पहुंच चुके रोगियों को आराम पहुंचाया है। आधुनिक चिकित्सा के पास ऐसी स्थितियों का समाधान अथवा उत्तर संभवतः नहीं है। दुनिया भर में संस्थानों ने इन पद्धतियों को गहराई से समझने के लिए अनुसंधान आरंभ किए हैं। दुनियाभर में सरकारें अपनी जनता के बीच इन पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए नीतियां बनाने का प्रयास कर रही हैं ताकि निर्धन वर्गों को अधिक लाभ हो सके। भारत में आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी पद्धतियों में शिक्षा तथा अनुसंधान पर ध्यान देने के लिए अलग मंत्रलय ही गठित कर दिया। मंत्रालय आयुष के शैक्षिक मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण और औषधियों के मानकीकरण, अनुसंधान तथा विकास को उन्नत बनाने और इस प्रणाली के प्रभावी होने के बारे में नई पीढ़ी को बताने के लिए देसी एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जोर देता रहता है। संयुक्त राष्ट्र ने भी शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए योग के सर्वांगीण लाभों को मान्यता दी तथा प्रत्येक वर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने के लिए दिसंबर 2014 में महासभा में प्रस्ताव पारित किया। पहली बार 21 जून 2015 को यह दिवस मनाया जाएगा। योजना ने भी इस अवसर पर अपने पाठकों को कुछ वैकल्पिक पद्धतियों, उन्हें संचालित करने वाले सिद्धांतों, उनके लाभों और कमियों से अवगत कराने का निर्णय लिया। वर्तमान सरकार अपने कार्यकाल का पहला वर्ष पूरा कर रही है और इस अंक में पिछले एक वर्ष में सरकार द्वारा आरंभ किए गए कुछ प्रमुख कार्यक्रमों पर दृष्टि डाली गई है तथा रोजगार सृजन, गरीबी उन्मूलन, खाई को पाटने और भारतीय अर्थव्यवस्था की समग्र वृद्धि पर उनके प्रभावों का विश्लेषण किया गया है। कहा जा सकता है कि वैकल्पिक चिकित्सा “वैकल्पिक” भर नहीं है बल्कि स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का आधार है और इसीलिए इसे प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का अंग होना चाहिए। पर्याप्त एवं समुचित सरकारी नीतियों के साथ इससे प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिए कष्टमुक्त एवं स्वस्थ्य जीवन सुनिश्चित हो सकता है।

 

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स्वास्थ्य व आरोग्य का सही मार्ग
-ईश्वर वी बासवरेड्डी
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यह उत्सुकता का विषय है कि योग का विकास ऐसे देशों में हो रहा है जहां पश्चिमी विज्ञान और वैज्ञानिक विधि आमतौर पर स्वास्थ्य सेवा के मुख्य आधार के रूप में स्वीकार्य है और “साक्ष्य आधारित” पद्धतियां ही प्रभावी मिसाल पेश करती हैं। चिकित्सा के ज्ञान भंडार में अनुभवों की जबरदस्त क्रांति और जीनोमिक औषधियां स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्रा में नए दृष्टिकोण लेकर आई हैं। आम जनता में प्राचीन दर्शन और चिकित्सा सेवा के दृष्टिकोण के प्रति एक अदृश्य लालसा दिखाई देती है। पूरक और पारंपरिक चिकित्सा की बढ़ती लोकप्रियता की एक वजह आधुनिक एलोपैथिक चिकित्सा की तेजी से बढ़ती कीमतें और इससे जुड़़े प्रतिकूल प्रभाव भी हैं
योग, अत्यंत सूक्ष्म विज्ञान पर आधारित एक आध्यात्मिक अनुशासन है, जो मन और शरीर के मध्य समरसता स्थापित करने पर केंद्रित है। यह स्वस्थ जीवन जीने की कला और विज्ञान दोनों है। योग का यह समग्र दृष्टिकोण भली-भांति स्थापित है और यह जीवन के सभी क्षेत्रों में सामंजस्य लाता है। इस प्रकार,यह रोग निवारण, स्वास्थ्य संवर्धन और जीवन शैली से संबंधित विकारों पर नियंत्रण कायम करने के लिए जाना जाता है।”योग” शब्द, मूल संस्कृत “युज” से आया है, जिसका तात्पर्य संलग्न होने या सम्मिलित करने का भाव है।
योग शास्त्रों के अनुसार योग का अभ्यास व्यक्तिगत और सार्वभौमिक चेतना के मध्य एकात्म स्थापित करने के मार्ग पर ले जाता है, जो मन और शरीर, मनुष्य और प्रकृति के मध्य पूर्ण तारतम्य का संकेत देता है। योग का उद्देश्य मुक्ति की अवस्था (मोक्ष) या निर्वाण (कैवल्य) के लिए सभी प्रकार की पीड़ा को विजित करने के लिए आत्मबोध अर्थात् आत्म-साक्षात्कार है। योग अभ्यास का मुख्य उद्देश्य जीवन के सभी क्षेत्रों में स्वतंत्र स्वस्थ और समरसता से रहना है। माना जाता है कि योगाभ्यास की शुरुआत सभ्यता के बहुत आरंभिक चरणों में ही हो गई थी। योग को व्यापक रूप से 2700 ईसवी पूर्व सिंधु सरस्वती घाटी सभ्यता की एक अमिट सांस्कृतिक विरासत के रूप में माना जाता है। योग ने मानवता के भौतिक और आध्यात्मिक दोनों ही उत्थान में अपनी भूमिका को साबित कर दिया है।


 

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झरोखा जम्मू कश्मीर का : कश्मीर में रोमांचकारी पर्यटन
जम्मू-कश्मीर विविधताओं और बहुलताओं का  घर है| फुर्सत के पल गुजारने के अनेक तरकीबें यहाँ हर आयु वर्ग के लोगों के लिए बेशुमार है| इसलिए अगर आप ऐडवेंचर टूरिस्म या स्पोर्ट अथवा रोमांचकारी पर्यटन में रूचि रखते हैं तो जम्मू-कश्मीर के हर इलाके में आपके लिए कुछ न कुछ है.
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Last updated: Wednesday, July 01, 2009