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हम आपदाओं के दौर में जी रहे है | यह सच है की इन आपदाओं को रोक पाना न तो इंसान के बस में है न ही मशीनों के| आपदाएं मानव निर्मित हों या प्राकृतिक , जिंदगी में गहरा दर्द छोड़ जाती है |
ज्यादातर आपदाएं भौतिक नुकसान (अर्थव्यवस्था,भवन, संपत्ति, सामाजिक व सांस्कृतिक) तो पहुंचाती ही है, लाखों जाने ले लेती है | प्रचलित प्राकृतिक आपदाओं में तूफान,बाढ़, बादल का फटना, भूकंप, सुनामी,आग लगना,आदि है जो मिनटों में मनुष्य के जीवन और संपत्ति को तबाह कर देते है |
जाहिर है आपदाएं तो आते रहेंगी लेकिन यदि हम ने इन आपदाओं का समुचित प्रबंधन या नियंत्रण नहीं किया तो स्थिति भयावह होगी |
भारतीय संदर्भ में यदि हम प्राकृतिक आपदाओं की बात करें तो आपदाओं से ज्यादा इसके समुचित प्रबंधन पर चर्चा करना जरुरी है |
वर्ष २००१ में जब भीषण भूकंप आया था तब सरकार ने घोषणा की थी की देश में आपदा प्रबंधन को विस्वस्तरिय बनाया जएगा | आज 11 वर्षों बाद भी यदी यहां के आपदा प्रबंधन की तैयारियों को देखें तो कोई खास बदलाव नहीं दिखेगा |
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