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सामान्यतया केंद्रसरकारका आगामी वर्षकाबजट फरवरी की अंतिम तारीख को संसद में पेश किया जाता है मगर इसबार पांच राज्यों में विधान सभाओं के चुनाव को देखते हुए इसे १६ मार्च को प्रस्तुत किया गया |
दो अन्य बातें जो कही अधिक महत्वपूर्ण है उनमे से पहली अनेक वर्षो से लोगों के सामने है| वह यह है की अब बजट पूंजी बाजारऔर वित्तीय कारोबार के बंद होने के बाद यानी सायं पांच बजे नहीं पेश किया जाता| उसे संसदकी बैठक आरंभ होतेहीप्रस्तुतकियाजाताहै|अब पहले की तरह सरकारी प्रस्तावों को लेकर न कोई अटकलबाजी होतीहैऔर न कोई गोपनीयता बरती जाती है |
सर्वविदितहै कि अर्थव्यवस्था और उससे जुड़ी नीतियों के निर्धारण और कार्यकलापों में काफी खुलापन आ गया है तथा सरकार के हाथों सेकई फैसलों के अधिकार बाज़ारऔर विनियामकों के पास चले गएहै| उदाहरणके लिए तेल की कीमतों को ले सकते है |
दूरसंचार और डाक के मामले मेंपहले के सामान सरकार का एकाधिकार नहीं रह गया है | टेलीफ़ोन की दरों औरडाक टिकटों तथा शुल्कों कोलेकरसरकारकी भूमिका काफी कम हो गईहै| सूचना प्रौधोगिकी के क्षेत्र में क्रांतिकारीपरिवर्तनों तथा निजी क्षेत्र कीभूमिका मोबाइल तथा फिक्स्ड लाइन फ़ोन एवं कुरियर सेवा को लेकर बढ़नेके कारण स्थिति काफी कुछ बदल गई है | |