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अनेक देश मुक्त व्यापार समझौतों के द्वारा निर्यात विस्तार के अवसर तलाश रहे है| पिछले दो दशकों के दौरान इसकी रफ़्तार बढ़ी है |
घरेलू हितधारक , चाहे वे उत्पादक हों, उपभोक्ता अथवा बिचौलिये, विकासशील दुनिया में अपने हितों में तुरंत सुधार
करना चाहते है|
उनकी व्यापार उदारीकरण नीतियां आर्थिक विकास और गरीबी घटाने की नीतियों से ज्यादा से ज्यादा संबद्ध की जा रही है| नवंबर २०११ की स्थिति के अनुसार विशव व्यापार संगठन द्वारा अधिसूचित मुक्त व्यापार समझौतों
की संख्या बढ़कर 505 तक पहुंच गई है|
मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से इसके सदस्य देशों को वचनबद्धता मिल जाती है जिसके अनुसार वे आपस में विभिन्न व्यापारिक बाधाओं को घटा सकते है या एकदम हटा सकते है| लेकिन गैर -सदस्य देशों के लिए वे ज्यों -की -त्यों बनी रहती है|
इस तरह से मुक्त व्यापार समझौतों के सदस्य देश एक -दूसरे के बाजारों में गैर -सदस्यों के मुकाबले आसानी से प्रवेश प्राप्त कर लेते है| उनके ऊपर लागू होने वाली रुकावटें और अन्य बातें उनके बीच हुए समझौतों पर निर्भर करती है|
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